Tuesday, February 14, 2012

जुबां अपनी-अपनी


          जुबां अपनी-अपनी
                            -डा.राज सक्सेना
षष्टिपूर्ति मना चुके मंत्री,
एक सरकारी रेस्ट हाउस में,
सोलह बर्षीया दलिता से,
बलात्कार करते हुए पकड़े गए |
मीडिया के कैमरों की,
जद में जकड़े गए |
पहले तो उन्होंने आरोप को
सिरे से नकार दिया |
जब क्लिप दिखाया गया,
तो यह बयान दिया |
"तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर ,
पेश किया  है|
बलात्कार हमने नहीं,कन्या ने किया है |
हमें तो विरोधियों और मीडिया ने,
 जबरदस्ती  फंसा दिया है |
**********
इस घटना पर शासक दल प्रवक्ता,
और विरोधी दल प्रवक्ता ने क्या कहा सुनिये |
कपड़े फाड़िये ? और सिर धुनिये ?
***********
विरोधी दल प्रवक्ता ने,
घटना को असहनीय,अतिनिन्दनीय कहा |
बोले,"मन मारकर अन्तिम बार सहा |
पूरा शासकदल  जनता से बलात्कार कर रहा है,
सी बी आई और पुलिस के साथ,
दोषी मंत्री का पक्षधर बन रहा है |
घटना जघन्य है,पी एम जिम्मेवारी लें,
और इसी क्षण स्तीफा दें |
वरना विरोधी दल संसद नहीं चलने देगा,
दलित और कानून से
बलात्कार नहीं करने देगा ?
************
शासक दल प्रवक्ता,
नाक भौं सिकोड़ते हुए गुर्राया |
इस घटना को सिरे से नकारते हुए,
विरोधी कल्पना का कमाल बताया |
जब वीडियो फुटेज दिखाए गए-
तो नरम हो लिया |
बोला मैने फुटेज देख लिया है,
क्या आपने गौर किया है ?
यह बलात्कार नहीं,सहमति है,
विरोधियों की चालों की दुष्ट परिणति है |
मंत्री तो उसे गले लगा रहे थे,
सरकारी नीति के अनुपालन में-
वर्गभेद मिटा रहे थे ?
**********
इन बयानों के चलते मीडिया ,
अपना जाल बुन रहा था |
तीनों बयानों में से,
धमाकेदार क्लिपिंग चुन रहा था |
शीघ्र ही सारे चैनल घटना की-
पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाएंगे ?
पूरे दिन पुराना ही तोड़-मोड कर दिखायेंगे ?
आप कितना ही ऊबते रहें,
वे इसे एक्सक्लूसिव ही बताएंगे |
आपको और आप जैसे टी वी खोरों को-
'लाइव' कहकर जबरदस्ती चटाएंगे |
आप देखें न देखें,
इसे देखकर कन्या-को
आत्मग्लानि से,आत्म हत्या करने की -
स्थिति तक पहुंचाएंगे ?
आत्म हत्या करले,क्या फर्क पड़ता है-
चैनल तो विज्ञापनों से,मालामाल हो जाएंगे |
 अगली बार कोई और-
 कन्या ढूंढ लाएंगे ?
 फिर यही सब दोहराएंगे,
 पैसे कमाने के लिये
 किसी भी हद तक गिर जाऍगे ?

         -धनवर्षा,हनुमानमन्दिर,खटीमा-262308(उ०ख०)
       मोबा-09410718777
 




Wednesday, February 8, 2012

हैरान कर देंगे


            हैरान  कर देंगे
                  -डा.राज सक्सेना
मतों के दान के बदले,जहर प्रतिदान कर देंगे |
कोई जीते कोई हारे,ये सब  हैरान  कर  देंगे |
जो हारेंगे वे भरपाई,  करेंगे लूट  जनता को,
जो जीतेंगे वसूली का , खुला मैदान कर देंगे |
करेंगे क्षेत्र को विकसित,ये कहते हैं हमेशा सब,
जहां मौका मिला,परिवार का उत्थान कर देंगे |
कहा तो है करेंगे, देश उन्नत हम सदा पहले,
प्रथम घरद्वार छैः मंजिल यही 'श्रीमान' कर देंगे |
किया वादा गरीबी को,  मिटाने का मिटा देंगे,
घटा कर दर गरीबी की,सभी धनवान कर देंगे |
दिखाने को मचाते शोर कितना रोज़ संसद में,
मचाने लूट ये मिलकर,नया कुछ प्लान कर देंगे|
ये गाते भोर में गाने,   बहुत से देशभक्ति के,
फंसे जो गांठ का पूरा,  तुरत हलकान कर देंगे |
कहां अपनी कहां सबकी ये इज़्ज़त मानते कब हैं,
लगे मौका तो भारत की ये गिरवीं शान कर देंगे |
कमाने के लिये रूपया,न छोड़ें ये कसर  बाकी,
मिले जो रोकड़ा नीलाम, हिदुस्तान  कर  देंगे |
कहां तक'राज'गिनवाएं,गुणों की खान हैं नेता,
ये अपना पेट भरने को,शहर वीरान कर  देंगे |
       

                                                                  धनवर्षा,हनुमानमन्दिर,
                                                                   खटीमा-262308(उ०ख०)
                                                                   मो-09410718777

लास्ट तक


  लास्ट तक
               - डा.राज सक्सेना
फ्युचर की दौड़ में जरा, सोचो  तो पास्ट तक |
रुक कर कहीं भी देखलो, झांको तो लास्ट तक |
इस देश की जम्हूरियत का जरा हाल देखिये -
हद तक सिमट के आगई है अपनी कास्ट तक |
कविता सुना के चल दिये कविवर दबंग जी,
हम सोचते ही रह गये , बैठेंगे लास्ट तक |
आये थे हमको देखने,  हम बीमार थे बहुत ,
अपनी कथा सुनाते रहे, सब को लास्ट तक |
टेबल में ठहरती है दुरान्तो, जाकर के अंत में,
हकीकत में नौ जगह तो ठहरती है लास्ट तक |
करने गरीबी दूर वो, निकले हैं जब से 'राज',
जनता को लेके आ गए जबरन वो फास्ट तक |

हैरान कर देंगे

  हैरान  कर देंगे
                  -डा.राज सक्सेना
मतों के दान के बदले,जहर प्रतिदान कर देंगे |
कोई जीते कोई हारे, हमें   हैरान  कर  देंगे |
जो हारेंगे वे भरपाई,  करेंगे खूब  जनता से,
जो जीतेंगे वसूली का , खुला मैदान कर देंगे |
करेंगे क्षेत्र को विकसित,ये कहते हैं हमेशा सब,
जहां मौका मिला,परिवार का उत्थान कर देंगे |
कहा तो है करेंगे, देश उन्नत हम सदा पहले,
प्रथम घर-द्वार दस मंजिल यही शैतान कर देंगे |
किया वादा गरीबी को,  मिटाने का मिटा देंगे,
गरीबों को मिटा कर,देश का कल्याण कर देंगे |
दिखाने को मचाते शोर कितना रोज़ संसद में,
मचाने लूट ये मिलकर,नया कुछ प्लान कर देंगे|
ये गाते भोर में गाने,   बहुत से देशभक्ति के,
फंसे जो गांठ का पूरा, उसे हलकान कर देंगे |
कहां अपनी कहां सबकी ये इज़्ज़त मानते कब हैं,
लगे मौका तो भारत की ये गिरवीं शान कर देंगे |
कमाने के लिये रूपया,न छोड़ें ये कसर  बाकी,
मिले जो रोकड़ा नीलाम, हिदुस्तान  कर  देंगे |
कहां तक'राज'गिनवाएं,गुणों की खान हैं नेता,
ये अपना पेट भरने को,शहर वीरान कर  देंगे |
        

Monday, February 6, 2012

Tuesday, January 31, 2012

चलाते हैं हम डण्डे


        चलाते हैं हम डण्डे
                  -डा.राज सक्सेना
      देवों के आयोग ने,  रख बल, बुद्धि, विवेक |
      सभी दलों से  यह कहा,छांटो इनमे  एक |
      दलित बताकर हाथी ने तब बल को मांगा ,
      शातिर पंजा छीन स्वंय,बुद्धि  ले   भागा |
      रहना पीछे 'राज',   कमल ने कभी न छोड़ा,
      मत्थे पड़ा विवेक , विवश हो उसने ओढा |
इस विवेक से हो गई,बी जे पी कन्फ्यूज |
सही वक्त पर मुददआ,कभी न करती यूज |
कभी न करती यूज,धूल में लट्ठ चलाते,
नहीं वरुण को, राहुल के पीछे   दौड़ाते |
कहे'राजकवि'वोट,अधिकतम खिंचकर आते,
पिटता दिग्गी रोज,चित्त राहुल हो  जाते |
        देख मिला इनको बहुत,गई स पा बौराय |
       संविधानजी से कहा,हमपर क्यों अन्याय |
       रखा न शेष बचाय, हमारी जड़ें न काटो,
       मांग हमारी मुस्लिम को आरक्षण बांटो |
       कहे 'राज कवि', संविधान तब रोकर बोला,
       वोटतुला से अलग,कभी क्या मुझको तोला |
तोला है तो क्या हुआ,करते यह सब अन्य |
लुंज-पुंज तुमको बना,नेता सब हैं  धन्य |
लोकपाल पर प्रश्न  करो , न चुप्पी  तोड़ें,
सभी जांच के प्रश्न,स्वंय अपने पर छोड़ें |
'राज'लोकपाल ये बिनारीढ इसलिये बनाएं ,
कर जाएं सब हड़प,सजा बिल्कुल न पाएं|
       माल-माल उदरस्थ कर , मट्ठा देंगे  छोड़ |
       बन कर पक्के सैकुलर, उसमें धर्म निचोड़ |
       उसमें धर्म निचोड़,जाति का  डालें  पंगा ,
       नहीं अगर कुछ मिले,करादें मजहब दंगा |
       कहे'राज कवि' ,पुलिसबलों के चलवा डण्डे,
       बांटे हम अनुदान,जीतने के यह सब फण्डे |
                                 -धनवर्षा,हनुमानमन्दिर,
    खटीमा- 262308(उ.ख.)मो०-09410718777

        चलाते हैं हम डण्डे
                  -डा.राज सक्सेना 
      देवों के आयोग ने,  रख बल, बुद्धि, विवेक |
      सभी दलों से  यह कहा,छांटो इनमे  एक |
      दलित बताकर हाथी ने तब बल को मांगा ,
      शातिर पंजा छीन स्वंय,बुद्धि  ले   भागा |
      रहना पीछे 'राज',   कमल ने कभी न छोड़ा,
      मत्थे पड़ा विवेक , विवश हो उसने ओढा |
इस विवेक से हो गई,बी जे पी कन्फ्यूज |
सही वक्त पर मुददआ,कभी न करती यूज |
कभी न करती यूज,धूल में लट्ठ चलाते,
नहीं वरुण को, राहुल के पीछे   दौड़ाते |
कहे'राजकवि'वोट,अधिकतम खिंचकर आते,
पिटता दिग्गी रोज,चित्त राहुल हो  जाते |
        देख मिला इनको बहुत,गई स पा बौराय |
       संविधानजी से कहा,हमपर क्यों अन्याय |
       रखा न शेष बचाय, हमारी जड़ें न काटो,
       मांग हमारी मुस्लिम को आरक्षण बांटो |
       कहे 'राज कवि', संविधान तब रोकर बोला,
       वोटतुला से अलग,कभी क्या मुझको तोला |
तोला है तो क्या हुआ,करते यह सब अन्य |
लुंज-पुंज तुमको बना,नेता सब हैं  धन्य |
लोकपाल पर प्रश्न  करो , न चुप्पी  तोड़ें,
सभी जांच के प्रश्न,स्वंय अपने पर छोड़ें |
'राज'लोकपाल ये बिनारीढ इसलिये बनाएं ,
कर जाएं सब हड़प,सजा बिल्कुल न पाएं|
       माल-माल उदरस्थ कर , मट्ठा देंगे  छोड़ |
       बन कर पक्के सैकुलर, उसमें धर्म निचोड़ |
       उसमें धर्म निचोड़,जाति का  डालें  पंगा ,
       नहीं अगर कुछ मिले,करादें मजहब दंगा |
       कहे'राज कवि' ,पुलिसबलों के चलवा डण्डे,
       बांटे हम अनुदान,जीतने के यह सब फण्डे |
                                 -धनवर्षा,हनुमानमन्दिर,
    खटीमा- 262308(उ.ख.)मो०-09410718777